Second Semester

Linguistic Debates & State Re-organisation in India

‘राज्य पुनर्गठन अधिनियम,1956’,भारत के राज्यों और उनकी क्षेत्रीय सीमाओं के भाषाई आधार पर पुनर्गठन से संबंधित एक महत्त्वपूर्ण अधिनियम था। हालाँकि 1956 के बाद से भारत में विभिन्न राज्यों की सीमाओं में कई बार परिवर्तन किए गए हैं, लेकिन 1956 के राज्य पुनर्गठन अधिनियम के द्वारा, स्वतंत्रता के बाद तत्कालीन राज्यों की सीमाओं में सबसे […]

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M.K.Gandhi’s Concept of State

राज्य के संबंध में महात्मा गांधी की विचारधारा अराजकतावादी दार्शनिक क्रोप्टकिन और लियो टॉलस्टाय के विचारों से प्रभावित है। गांधी जी ने राज्य के वर्तमान या भावी स्वरूप के विषय में अपने विचार स्पष्ट रूप से लिपिबद्ध नहीं किया क्योंकि वे भविष्य की संस्थाओं की रूपरेखा निर्धारण को असामयिक और अवैज्ञानिक मानते थे तथापि उनके

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सोवियत संघ के विघटन से उत्पन्न परिस्थितियां

सोवियत संघ के विघटन से उत्पन्न परिस्थितियां सोवियत संघ की सेना प्रारंभ में ‘CIS’, के नियंत्रण में रहीं परंतु शीघ्र ही स्वतंत्र नवोदित राष्ट्रों की पृथक-पृथक सेना के रूप में विभक्त हो गई । कुछ अन्य सोवियत संस्थाएं “जिसका अधिग्रहण रूस द्वारा नहीं किया गया” 1991 के अंत के साथ उनका कार्य समाप्त हो गया

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सोवियत संघ के विघटन की समय रेखा

सोवियत संघ के विघटन की समय रेखा ‘मिखाईल गोर्बाचोव’, के तख्तापलट का प्रयास सोवियत संघ के विघटन में अंतिम आघात सिद्ध हुआ। गोर्बाचोव ने पार्टी के महासचिव के पद से इस्तीफा दे दिया तथा येल्तसिन ने  6 नवंबर 1991 को एक शासनादेश के द्वारा रूस की धरती पर कम्युनिस्ट पार्टी की सभी गतिविधियों को प्रतिबंधित

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सोवियत संघ के विघटन के कारक

सोवियत संघ के विघटन का आरंभ करने वाले कारक 1. संप्रभुता की परेड (The parade of sovereignties) सोवियत संघ के गणराज्यों के द्वारा, 1988 – 1991 के मध्य, अपनी संप्रभुता घोषित किए जाने का एक क्रम था। ये संप्रभुता वैधानिक शर्तों पर आधारित थी, जिसमें गणराज्य की आंतरिक संप्रभुता को सोवियत संघ के केंद्रीकृत वैधानिक

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साम्यवाद की विफलता

सोवियत संघ के ‘East Block’ में साम्यवाद की विफलता मिखाईल गोर्बाचोव, सोवियत संघ के ‘Satellite States’ अर्थात औपचारिक रूप से स्वतंत्र परंतु राजनीतिक,आर्थिक दृष्टि से, सोवियत संघ के प्रभाव और नियंत्रण वाले देशों में साम्यवादी शासन के प्रति हो रही विद्रोही गतिविधियों के प्रति तटस्थ रहा। इससे पहले लियोनिड ब्रेझनेव की विदेश नीति में, Soviet

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सोवियत संघ का विघटन

सोवियत संघ में विघटनकारी प्रवृत्तियों का प्रादुर्भाव 1977 अक्टूबर में तीसरे ‘सोवियत संविधान’ को सर्वसम्मति से लागू किया गया लेकिन 1980 के दशक के आरंभ तक ‘सोवियत कम्युनिस्ट (साम्यवादी) पार्टी’, जराजन्य प्रवृत्तियों के प्रभाव में आ चुकी थी। ‘लियोनिड ब्रेझनेव’ लंबे कार्यकाल के बाद जीवन के आखिरी वर्षों में अपने पूर्व जुझारू व्यक्तित्व की धुंधली

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सोवियत संघ क्या है?

सोवियत संघ का परिचय सोवियत संघ (USSR) का औपचारिक नाम “सोवियत समाजवादी गणतंत्रो का संघ” या “Union of Soviet Socialist Republic” था। ‘सोवियत’ रूसी भाषा का एक शब्द है, जिसका अभिप्राय परिषद, सभा, सलाह और सद्भाव होता है। सोवियत संघ उत्तरी यूरेशिया के विशाल भू-भाग पर विस्तृत, एक अंतरमहाद्वीपीय देश था। यह 22,402,200 वर्ग किलोमीटर 

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अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर ‘स्पेन के गृहयुद्ध’ का प्रभाव

फ्रांको की गृहयुद्ध में विजय ‘धुरी-राष्ट्रों’ अर्थात ‘इटली’ एवं ‘जर्मनी’ तथा ‘फासिस्ट-विचारधारा’ की विजय थी तथा गृहयुद्ध के बाद स्पेन की विदेश नीति पूर्ण रूप से ‘जर्मनी’, ‘इटली’ और ‘पुर्तगाल’ की ओर केंद्रित हो गई। 1939 में स्पेन सरकार ने ‘जर्मनी’ और ‘जापान’ के बीच हुए ‘कामिंटर्न – विरोधी’ समझौते पर हस्ताक्षर किया। वस्तुत: ‘स्पेन’

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स्पेन की सरकार का पतन और फ्रांको की सत्ता की स्थापना

फरवरी 1939 में राष्ट्रपति ‘अजाना’ ने त्यागपत्र दे दिया तथा ‘फ्रांस’ और ‘ब्रिटेन’ ने ‘फ्रांको’ की सरकार को ‘स्पेन’ के शासक के रूप में अंतरराष्ट्रीय मान्यता दे दी। यद्यपि प्रधानमंत्री ‘नेगरिन’ ने राजधानी ‘मेड्रिड’ को आधार बना कर युद्ध जारी रखने का प्रयत्न किया परंतु फ्रांको की सत्ता को चुनौती देना असंभव था। 5 मार्च

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