Second Semester

स्पेन में 1936 का निर्वाचन

फरवरी 1936 में वामपंथी दलों के संयुक्त मोर्चे ‘पॉपुलर फ्रंट’ और ‘दक्षिणपंथी एवं मध्यवर्ती दलों’ के गठबंधन के बीच हुए चुनाव में बहुत कम सदस्यों के अंतर से ‘पॉपुलर फ्रंट’ को संसद में मामूली बहुमत मिला तथा ‘अजाना’ ने केवल गणतंत्रवादियों की सदस्यता वाले मंत्रिमंडल का गठन किया। ‘अजाना’ ने वामपंथी राजनीतिक बंदियों को रिहा […]

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स्पेन में प्रथम संसदीय निर्वाचन (नवम्बर 1933)

स्पेन में नए संविधान के तहत हुए,1933 नवम्बर के प्रथम निर्वाचन में दक्षिणपंथी दलों के गठबंधन ‘Spanish Confederation of Autonomous Right Wing Group’ या ‘CEDA’ को 473 में से 207 सीटें मिली, ‘मध्यवर्ती दल’ या ‘Radical party’ को 167 तथा वामपंथी दलों को 99 स्थान मिले। सत्तारूढ़ दल की सदस्य संख्या में कमी से स्पष्ट

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स्पेन में गणतंत्रवादी सरकार के निर्णय और प्रभाव

भूमि सुधार  सितंबर 1932 में स्पेन की ‘कोर्टेज’ ने कानून पारित कर 5 करोड़ एकड़ से अधिक  अविकसित भूमि और स्पेन से निष्कासित व्यक्तियों की निजी-भूमि को बगैर मुआवजा दिए तथा कुछ कुलीनो की भूमि को मुआवजा देकर अधिग्रहित कर लिया तथा भूमिहीनों में इनके पुनर्वितरण की घोषणा की गई। इस कानून से भू-स्वामी कुलीन

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‘स्पेन’ में ‘गणतंत्र’ की स्थापना

‘स्पेन’ मे राजा के पलायन के बाद ‘अलकाला जामोरा’ की अध्यक्षता में ‘गणतंत्रवादियों’ और ‘समाजवादियों’ को शामिल कर एक अस्थायी कार्यवाहक सरकार गठित की गई। इस सरकार के द्वारा लिए गए कुछ निर्णयो में – अपनी विचारधारा के समर्थक राजनीतिक बंदियों को क्षमा प्रदान कर रिहा करना, राजा की संपत्ति जब्त करना, अभिजात वर्ग की

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स्पेन में सैन्य अधिनायकत्व का कालखंड (1923 -1931)

जनरल ‘मिग्रयल प्राइमो ड रिवेरा’ का कार्यकाल सत्ता ग्रहण के पश्चात ‘रिवेरा’ ने सैनिक निदेशक मंडल का गठन कर संपूर्ण राष्ट्र में सैनिक-कानून लागू कर दिया। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को नियंत्रित, न्यायिक तंत्र में ‘जूरी’ के प्रावधान को प्रतिबंधित और समस्त म्युनिसिपलो एवं स्वायत्त संस्थाओं को भंग कर उसने ‘कैटेलोनिया’ के पृथकतावादी आंदोलन का दमन

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स्पेन के गृहयुद्ध की पृष्ठभूमि

19 वीं सदी से ही स्पेन राजनीतिक-सामाजिक अव्यवस्था के दौर से गुजर रहा था। 1812 में स्पेन में संविधान लागू हुआ,जिसने राजा के अधिकार को सीमित कर उदारवादी राज्य की स्थापना का मार्ग प्रशस्त कर किया लेकिन ‘राजा फर्डिनेंड VII’ द्वारा संविधान को निरस्त तथा ‘Trienio liberal government’ को अपदस्थ करने के बाद ‘1814 –

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स्पेन का गृहयुद्ध: एक परिचय

‘स्पेन का गृहयुद्ध (Spanish Civil War)’ स्पेन में 1936 -1939 के मध्य स्पेन के ‘गणतंत्रवादियो (Republicans)’ और ‘राष्ट्रवादियों (Nationalists)’ के मध्य हुआ सशस्त्र सत्ता-संघर्ष था। स्पेन में गृहयुद्ध आरंभ होने के समय ‘मेनुअल अजाना’ के नेतृत्व में ‘पॉपुलर फ्रंट’ की सरकार थी, जिसे ‘कोर्टेस (संसद)’ में कम्युनिस्ट और सोशलिस्ट पार्टियों का समर्थन था। ‘स्पेन’ के

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Kautilya

प्राचीन सप्तांगिक राज्य और आधुनिक प्रभुसत्तात्मक राज्य : विवेचन

‘अर्थशास्त्र: में राज्य के सातों अंगों के पारस्परिक संबंधों पर प्रकाश डाला गया है। इसके अनुसार हर पूर्ववर्ती अंग,परवर्ती अंग से अधिक महत्वपूर्ण है – यथा, अमात्य-जनपद से, जनपद-दुर्ग से,  दुर्ग-कोष से एवं कोष-दंड से अधिक महत्वपूर्ण है। ‘कौटिल्य’ के अनुसार, ‘स्वामी’ सभी अंगों में सर्वाधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि यथेष्ट गुणों से संपन्न होने पर

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Saptanga Theory

कौटिल्य के सप्तांग सिद्धांत में राज्य के विभिन्न अंग

1. स्वामी ‘सप्तांग सिद्धांत’ से संबंधित सभी स्रोत ग्रंथों में, राज्य के प्रधान के लिए ‘स्वामी’ शब्द का उल्लेख हुआ है। जिसका अर्थ है, अधिपति। ‘कौटिल्य’ द्वारा वर्णित व्यवस्था में, राज्य-प्रधान को अत्यंत उच्च स्थिति प्रदान की गई है। उसके अनुसार ‘स्वामी’ को अभिजात्य, प्रज्ञावान, शिक्षित, उत्साही, युद्ध कला में चतुर तथा अन्य उत्तम चारित्रिक

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Kautilya

कौटिल्य के सप्तांग सिद्धांत : परिचय

प्राचीन भारत में राजनीतिक चिंतकों ने राज्य की प्रकृति का निरूपण  ‘सप्तांग सिद्धांत’ के द्वारा किया था । वैदिक साहित्य और प्रारंभिक विधि-ग्रंथों अर्थात ‘धर्मसूत्रों’  में  ‘राज्य’ की परिभाषा नहीं मिलती है। यद्यपि कुछ प्रारंभिक ‘धर्मसूत्रों’ में राजा, अमात्य, विषय आदि कतिपय राज्य से संबद्ध अंगों का उल्लेख है,लेकिन बुद्ध के युग में ‘कौशल’ और

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