वियना कांग्रेस के निर्णयकर्ता

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वस्तुतः वियना कॉन्ग्रेस वास्तविक अर्थों में एक औपचारिक कांग्रेस नहीं थी क्योंकि ना कभी इसका उद्घाटन हुआ और ना ही एक सभा के तौर पर समस्याओं पर विचार के लिए इसकी बैठके  हुई बल्कि निर्णय विजेता राष्ट्रों के प्रतिनिधियों ने ही मुख्य रूप से लिए। वियना में यूरोप के सभी राज्यों के प्रतिनिधि मंडल थे जिसमें चीन में जिनमें 200 से अधिक राष्ट्र और रियासतों के  प्रतिनिधियों के अतिरिक्त नगरों, निगमों धार्मिक संगठनों तथा विशेष हित समूह यथा  जर्मन प्रकाशक, जो कॉपीराइट कानून और स्वतंत्र प्रेस की मांग के लिए कांग्रेस में शामिल हुए थे। वियना में उपस्थित इन सभी प्रतिनिधियों में चार देशों ऑस्ट्रिया, रूस, ब्रिटेन, प्रशा और उनके प्रतिनिधियों का सर्वाधिक महत्व था।

प्रिंस क्लेमेंस वेन्ज़ेल वॉन मेटर्निच

1. ऑस्ट्रिया

वियना कांग्रेस की अध्यक्षता तथा कांग्रेस में ऑस्ट्रिया का प्रतिनिधित्व ‘मेटरनिख’ और उसके सहायक ‘जोसन वोन बेसेनबर्ग’ ने किया था। वियना कांग्रेस में ‘मेटरनिख’ की भूमिका सर्वाधिक प्रभावशाली थी तथा उसकी प्रतिक्रियावादी विचारधारा का प्रभाव नेपोलियन के पतन के पश्चात यूरोपीय राजनीति पर इतना गहरा था कि उसके कार्यकाल से लेकर राजनयिक पतन तक के कालखंड को ‘मेटरनिख -काल’ कहा जाता हैं।

लॉर्ड कैसलरीघ

2. ब्रिटेन

वियना कांग्रेस की संपूर्ण कार्यावधि में ब्रिटेन का प्रतिनिधित्व तीन व्यक्तियों ने किया। आरंभ में ब्रिटिश प्रतिनिधि विदेश सचिव ‘विस्काउंट कासलरिया’ थे, उसके बाद ‘ड्यूक ऑफ वेलिंगटन’ और कांग्रेस के अंतिम सप्ताह में ‘अर्ल ऑफ क्लैनकार्टी’ थे।

काउंट कार्ल रॉबर्ट नेसेलरोडे

3. रूस

रूस के प्रतिनिधिमंडल का सर्वोच्च नेतृत्वकर्ता जार ‘अलेक्जेंडर प्रथम’ था लेकिन औपचारिक रूप से वार्ता में प्रतिनिधित्व रूसी विदेश मंत्री ‘काउंट कार्ल रॉबर्ट नेसेलरोडे’ ने किया।

4. प्रशा  

प्रशा के प्रतिनिधिमंडल में प्रशा के शासक ‘फ्रेडरिक विलियम III’ के साथ कूटनीतिज्ञ ‘विल्हेम वॉन हम्बोल्डट’ और मुख्य वार्ताकार ‘चार्ल्स ऑगस्ट वॉन हार्डेनबर्ग’ शामिल थे।

चार्ल्स मौरिस डे टेलीरैंड

5. फ्रांस

वियना कांग्रेस में फ्रांस का नेतृत्व विदेश मंत्री ‘तालिरां’ और किसी भी निर्णय को लेने के लिए पूर्ण अधिकार प्राप्त मंत्री ‘ड्यूक ऑफ डालबर्ग’ ने किया था

इसके अतिरिक्त वियना कांग्रेस में डेनमार्क, नीदरलैंड, स्विट्जरलैंड के कैंटेनो, सार्डिनिया, जेनोआ गणराज्य, टस्कनी की ग्रैंड डची, बवेरिया, हैनोवर, स्पेन, पुर्तगाल, स्वीडन आदि देशों के राजा, राजकुमार और कूटनीतिज्ञों के साथ हीं पोप शासित राज्यों के प्रतिनिधि भी शामिल थे।

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